G-20 के सफलता पूर्वक आयोजन से दिखी भारत की नेतृत्व क्षमता (Mygov(editorial)4-Oct-23)

यदि मजबूत इरादे को लेकर नेतृत्व को लेकर नेतृत्व किया जाए तो कुछ भी असंभव नहीं

हमारा यह दृढ़ विश्वास है कि जब भी और जहां भी उचित हो, श्रेय मिलना ही चाहिए। जी-20 का सफलतापूर्वक आयोजन         व दिल्ली घोषणा पत्र पर सर्व सम्मति का वैश्विक प्रभाव, भारत की वर्तमान एवं भविष्य की नेतृत्व के लिए भूमिकाओं के रूप में देख सकते है। चंद्रयान-3 की सफलता ने पहले ही भारत की प्रतिष्ठा में चार चांद लगाकर भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में अग्रणी देश के रूप में प्रस्तुत किया है। हाल में हुई दोनों ही घटनाएं, यह प्रदर्शित करती है कि यदि नेतृत्व में दूरदर्शिता, प्रतिबद्धता व इच्छा शक्ति हो तो बड़ी- बड़ी चीजों को भी हासिल किया जा सकता है।

बचपन में हम पढ़ते थे कि भारत एक अमीर देश है, जहां गरीब रहते हैं इससे हमें यह पता चलता है कि तत्कालीन नेतृत्व किस प्रकार भारतीयों की वास्तविक क्षमताओं को उभारने में नाकाम हुआ था। मोदी के सत्ता में आते ही यह परिदृश्य पूरी तरह से परिवर्तित हुआ है। हमें कई बार महसूस हुआ कि प्रधानमंत्री की कुछ पहल बहुत महत्वाकांक्षी एवं असंभव सी है। तत्पश्चात हमने देखा की यदि मजबूत इरादे को लेकर नेतृत्व किया जाए तो कुछ भी असंभव नहीं है। हम देखते है की हर समय विपक्ष का रवैया आलोचनात्मक व नई पहलों के लिए रुकावट करने वाला रहा हैं, ऐसे में सभी उद्देश्य पूर्ति कोई छोटी उपलब्धियां नहीं हैं। 

कोविड संकट से निपटना तय समय में सफलतापूर्वक घरेलू वैक्सीन तैयार करना और 230 करोड़ लोगो तक वैक्सीन पहुचाना एक सुचारू प्रशासनिक दक्षता का ही प्रमाण है। कोविड के बाद आर्थिक विकास, आर्थिक सुधार को सटीक समय पर लागू करना, राजकोषीय प्रोत्साहन व महंगाई का सफल प्रबंधन, सरकार की महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ है। कोविड के बाद विश्व के अमेरिका, यूरोप और चीन जैसे राष्ट्र भी आर्थिक संकट से जूझ हैं जबकि भारत इससे अलग तीव्र गति से आर्थिक विकास पर अग्रसर है। भारत द्वारा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (यूपीआई) का विकास, जिसका गुणगान आज दुनिया कर रही है, आधुनिक मानव इतिहास में अद्वितीय साबित हो रहा है।

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट कहती है कि भारत के वित्तीय समावेशन कार्यक्रम ने 47 साल के काम को मात्र 6 साल में पूरा कर दिखाया है। दिल्ली घोषणापत्र में जी-20 देशों द्वारा यूपीआई को अपनाना इस बात की ओर संकेत करते हैं कि वसुधैव कुटुंबकम (विश्व एक परिवार है) और आनो भद्राः क्रतवो: यंतु विश्वतः (हर दिशा से नेक विचार हमारे पास आएं) की हमारी प्राचीन अवधारणा मात्र दार्शनिक कथन नहीं हैं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी ने इन्हें अपनी इच्छाशक्ति और दूरदर्शिता से ज़मीन पर लागू करके दिखाया है। विकासशील देशों को वैक्सीन मैत्री कार्यक्रम के तहत मुफ्त टीके उपलब्ध करवाना हो या वैक्सीन पर आईपीआर प्रतिबंधों को दूर करना, प्रधानमंत्री जी का हर एक कदम सराहनीय रहा है। अब जी-20 के माध्यम से भारत अपने डिजिटल इन्फास्ट्रक्चर मॉडल को विश्व के लिए पब्लिक गुड के रूप में प्रस्तुत कर रहा है । इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि किसी वित्तीय कार्यक्रम को आईटी दिग्गजों के व्यक्तिगत लाभ व व्यवसाय के लिए नहीं बल्कि सबकी भलाई के लिए सार्वजानिक रूप से पेश किया जा रहा है। 

यह एक महत्वपूर्ण भारतीय उपलब्धी है जो कि वर्तमान में सम्पूर्ण विश्व के लिए प्रस्तुत किया गया है। मेरे लिए यह न सिर्फ प्रधानमंत्री का जन कल्याण कार्यक्रम है जो ‘एक राष्ट्र, एक परिवार, एक भविष्य’ का संदेश देता है बल्कि यह कार्यक्रम हमारा ध्यान इसलिए भी आकर्षित कर रहा है क्योंकि यह भारतीय नेतृत्व को वैश्विक पहचान देने का एक जरिया है। घरेलू कनेक्टिविटी वाला बुनियादी ढांचे के निर्माण में निवेश हो या अभी जी-20 समूह के अंतर्गत भारत- मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारे की घोषणा यह भारत में निवेश की सम्भावनाओं को तो बढ़ा रहा है और हमारी व्यापर एवं रणनीतिक सुरक्षा की आवश्यकतों को भी मजबूत करेगा। यह आर्थिक गलियारा न सिर्फ प्रधानमंत्री की दूरदृष्टि और मेहनत का परिचायक है बल्कि स्वेज कैनल व बंदरगाहों के माध्यम से व्यापार मार्ग को सुरक्षित करने के लिए इजरायल और ग्रीस जैसे यूरोपिय देशों से वार्तालाप करने की उनकी सूझबूझ का भी परिचायक है।

भारत – मध्य पूर्व यूरोप गलियारा, चीन के बीआरआई का जवाब है। बीआरआई के तहत एक के बाद एक देश जैसे पाकिस्तान, श्रीलंका व केन्या कर्ज के बोझ तले दबे जा रहे हैं । अब भारत दक्षिण एशियाई देशों की मजबूत आवाज भी बन रहा है और अफ्रीकी देशों के विकास और एकीकरण के स्वर को बुलंद कर रहा है।

गोपाल कृष्ण अग्रवाल,

राष्ट्रीय प्रवक्ता भाजपा

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