गोपाल कृष्ण अग्रवाल,
आर्थिक प्रवक्ता, भाजपा ।
नरेंद्र मोदी सरकार का पूंजीगत व्यय बढ़ाने पर निरंतर ध्यान केंद्रित रखना अपने देश के चौतरफा विकास को सुनिश्चित करेगा। भारत की मजबूत आर्थिक व्यवस्था को गति प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए पूंजीगत व्यय को 33 प्रतिशत बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। देश में बुनियादी सुविधाओं के विकास से आर्थिक तरक्की को हर तरह से तेजी मिलेगी।
कोविड महामारी के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था महंगाई, मंदी और बजटीय घाटे के चक्रव्यूह में फंस गई है। चाहे अमेरिका हो, यूरोप के आर्थिक रूप से विकसित देश हों या चीन, हर जगह मंदी के संकेत दिखने लगे हैं। विकसित देश हों या फिर पाकिस्तान, श्रीलंका, तुर्की जैसे विकासशील देश, सभी के आर्थिक विकास की गति डगमगा गई है। उनके द्वारा कोविड महामारी से निजात पाने के लिए जो नीतियां अपनाई गई थीं, वे सकारात्मक परिणाम नहीं ला पाई हैं।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपनाई गई आर्थिक-सामाजिक नीतियों के परिणामस्वरूप भारत आज विश्व की सबसे तीव्र गति से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्था बन चुका है और दुनिया में अग्रणी अर्थव्यवस्था वाले देश में शुमार है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, अपना देश महंगाई को नियंत्रित करने में सफल है। दुनिया के अनेक देशों में महंगाई तेजी से बढ़ रही है। हमारी अर्थव्यवस्था मंदी से उबरकर रफ्तार पकड़ चुकी है और अब इस बजट में स्पष्ट रूप से वित्तीय घाटे को पाटने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। आने वाले वर्ष में वित्तीय घाटा 5.9 प्रतिशत हो जाएगा और वित्त वर्ष 2024-25 में यह 4.5 प्रतिशत रहेगा।
इस बार सरकार ने किसी भी प्रकार के नए कर नहीं लगाए हैं और सभी करदाताओं को राहत प्रदान की है। अपने आधारभूत संरचना निर्माण व जन-कल्याणकारी योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री आवाज योजना, छोटे, मध्यम और मझोले उद्योगों को सहायता, कृषि एवं सहकारी क्षेत्र को विशेष राहत दी है। भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, अगर सरकार आधारभूत क्षेत्र में एक रुपया खर्च करती है, तो उससे अर्थव्यवस्था में दो रुपये से भी ज्यादा की मांग सृजित करने की क्षमता होती है।
छोटे करदाताओं को विशेष राहत मिली है। सात लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले व्यक्ति को शून्य टैक्स देना पड़ेगा। युवाओं के कौशल विकास के लिए केंद्रों का निर्माण, कर्मयोगी योजना में हाथ से काम करने वालों के सशक्तीकरण का विशेष प्रावधान है। भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए वैकल्पिक ऊर्जा जैसे हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना और हरित विकास के तहत कार्बन उत्सर्जन को कम किया जाएगा। नए महत्वपूर्ण क्षेत्र जो आने वाले समय में देश को वैश्विक स्तर पर स्थापित करेंगे, जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता और 5 जी सेवा पर ध्यान केंद्रित किया गया है। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी बड़ी पहल की गई है। समुद्र के तट पर मैनग्रोव पौधरोपण और नमभूमि में वन्य संपदा को संरक्षित करने की भी घोषणा महत्वपूर्ण है।
गरीब कल्याण इस सरकार की प्राथमिकता है। इस बजट में करीब दो लाख करोड़ रुपये के प्रावधान से सभी
अंत्योदय वाले परिवारों को मुफ्त खाद्यान्न की घोषणा की गई है। मत्स्य पालन में शामिल लोगों को सक्षम बनाया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्र में सरकार भंडारण क्षमता बढ़ाएगी। मोटे अनाज का उत्पादन बढ़ाने के लिए भी इस बार विशेष प्रावधान किए गए हैं।
सामाजिक न्याय प्रक्रिया को सुगम एवं सर्वग्राही बनाने के लिए भी घोषणाएं की गई हैं। कैदियों के मानवाधिकार को ध्यान में रखते हुए, जिनके पास जमानत की राशि की व्यवस्था नहीं है, उनके लिए सहायता राशि आवंटित की गई है। दुनिया की निगाहें भारत पर हैं, क्योंकि हमारा देश जी 20 की अध्यक्षता कर रहा है। यह केंद्रीय बजट भारत की विकास यात्रा को जारी रखने और विश्व व्यवस्था में भारत की भूमिका को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।
इसमें कोई दोराय नहीं कि प्रधानमंत्री का जो संकल्प है कि आने वाले समय में भारत विश्व गुरु के स्थान पर स्थापित हो, इसके लिए हमें आर्थिक महाशक्ति बनना होगा। यह बजट उसका मार्ग प्रशस्त करने के लिए नींव का पत्थर साबित होगा। अब हमें सामूहिक संकल्प के साथ बजट के लक्ष्यों को प्राप्त करना है।

